Samachar Uday

3

What's New?

kedarnath

आस्था और श्रद्धा के प्रतीक भगवान श्री केदारनाथ धाम के कपाट कल दिनांक 22 अप्रैल 2026 को प्रातः 08:00 बजे […]

sea-food

एमपीईडीए की ओर से जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात रिकॉर्ड ₹72,325.82 […]

new-tehri-fire-department-fire-control

फायर स्टेशन नई टिहरी की त्वरित कार्रवाई से अलग-अलग स्थानों पर लगी जंगल की आग पर समय रहते काबू पा […]

alert

जापान ने सोमवार को एक खास एडवाइज़री जारी की, जिसमें 8.0 या उससे ज़्यादा तीव्रता वाले भूकंपों के बढ़ते खतरे […]

drdo-man-guided-anti-tank-missile

डीआरडीओ ने चलाएमान लक्ष्य के विरुद्ध उच्चतम आक्रमण क्षमता वाली मानव-चालित एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया

डीआरडीओ की रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला, हैदराबाद द्वारा महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित केके रेंज में उच्‍चतम आक्रमण क्षमता वाली तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) का 11 जनवरी, 2026 को सफल उड़ान परीक्षण किया गया। स्वदेशी रूप से विकसित इस एमपीएटीजीएम में इमेजिंग इन्फ्रारेड (आईआईआर) होमिंग सीकर, ऑल इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन सिस्टम, फायर कंट्रोल सिस्टम, टैंडम वारहेड, प्रणोदन प्रणाली और उच्च प्रदर्शन लक्ष्यीकरण प्रणाली जैसी अत्याधुनिक स्वदेशी प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, जिन्हें डीआरडीओ की सहयोगी प्रयोगशालाओं जैसे अनुसंधान केंद्र इमारत (हैदराबाद), टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (चंडीगढ़) उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (पुणे) और उपकरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (देहरादून) द्वारा विकसित किया गया है।

थर्मल टारगेट सिस्टम को जोधपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला द्वारा लक्ष्‍य टैंक के अनुकरण करने हेतु विकसित किया गया था। आईआईआर सीकर दिन और रात दोनों समय युद्ध संचालन की क्षमता से युक्‍त है। इसका वारहेड आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों को नष्ट करने में सक्षम है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इस हथियार प्रणाली के विकास-सह-उत्पादन भागीदार (डीसीपीपी) हैं। इस मिसाइल को ट्राइपॉड या सैन्य वाहन लॉन्चर से प्रक्षेपित किया जा सकता है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, डीसीपीपी भागीदारों और संबंधित उद्योग जगत की प्रशंसा की। उन्होंने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

टीम को बधाई देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने कहा कि परीक्षण लक्ष्य के विरूद्ध सफलतापूर्वक किया गया, जिससे ये हथियार प्रणाली भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार हो गई है।

Share this
Scroll to Top