भारत के बल्लेबाज विराट कोहली ने सोमवार को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की।
उन्होंने भारत के लिए 123 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 46.85 की औसत से 30 शतकों के साथ 9230 रन बनाए। पिछले साल ही टी20 अंतरराष्ट्रीय से संन्यास लेने के बाद अब वह केवल वनडे मैच ही खेलेंगे। कोहली ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर घोषणा की, “मैं खेल के लिए, मैदान पर खेलने वाले लोगों के लिए और हर उस व्यक्ति के लिए आभार से भरा दिल लेकर जा रहा हूं, जिसने मुझे इस दौरान साथ दिया।” इस तरह से उन्होंने इस प्रारूप में अपने भविष्य को लेकर लगातार अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा, “टेस्ट क्रिकेट में पहली बार बैगी ब्लू जर्सी पहने हुए 14 साल हो चुके हैं। ईमानदारी से कहूं तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह प्रारूप मुझे किस सफर पर ले जाएगा।
इसने मेरी परीक्षा ली, मुझे आकार दिया और मुझे सबक सिखाया जिसे मैं जीवन भर साथ रखूंगा।” मेगास्टार का आखिरी टेस्ट ऑस्ट्रेलिया का दौरा था जिसमें वह सिर्फ एक शतक बना पाए थे। वह अपने करियर का अंत 10,000 रन के आंकड़े से पहले कर रहे है, जिसे एक समय औपचारिकता माना जाता था। दाएं हाथ के इस खिलाड़ी ने सात दोहरे शतकों के साथ इस प्रारूप के दिग्गज के रूप में अपनी पहचान बनाई, जो किसी भारतीय के लिए सबसे अधिक है और सुनील गावस्कर (4), सचिन तेंदुलकर (6), वीरेंद्र सहवाग (6) और राहुल द्रविड़ (5) की प्रतिष्ठित जोड़ी से आगे है। ऐसे समय में जब टी20 लीग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली और देखी जाने वाली लीग बन गई, कोहली के आभामंडल ने प्रशंसकों को टेस्ट क्रिकेट से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस बात को सर विव रिचर्ड्स ने भी माना, जिनके साथ उनकी अक्सर तुलना की जाती थी।
कोहली ने इस प्रारूप के लिए अपने विदाई नोट में लिखा, “सफेद कपड़ों में खेलना बहुत ही निजी होता है। शांत परिश्रम, लंबे दिन, छोटे-छोटे पल जिन्हें कोई नहीं देखता लेकिन जो हमेशा आपके साथ रहते हैं।” “जब मैं इस प्रारूप से दूर जा रहा हूँ, तो यह आसान नहीं है – लेकिन यह सही लगता है। मैंने इसमें अपना सबकुछ दिया है, और इसने मुझे मेरी उम्मीद से कहीं ज़्यादा दिया है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा अपने टेस्ट करियर को मुस्कुराते हुए देखूंगा।” उनके संन्यास के साथ ही टेस्ट क्षेत्र से भारतीय दिग्गजों का पलायन जारी है। रविचंद्रन अश्विन (दिसंबर में) और रोहित शर्मा (पिछले सप्ताह) अन्य ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने इस प्रारूप को अलविदा कह दिया है।






