प्लास्टइंडिया 2026, जो दुनिया की सबसे बड़ी प्लास्टिक प्रदर्शनियों में से एक है, आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में शुरू हुआ। इस त्रैवार्षिक कार्यक्रम का 12वां संस्करण 5 से 10 फरवरी 2026 तक रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग (डीसीपीसी), रसायन और उर्वरक मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
“भारत नेक्स्ट” थीम के अंतर्गत आयोजित, प्लास्टइंडिया 2026 माननीय प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विज़न के अनुरूप है, और यह प्लास्टिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं, निर्माण उत्कृष्टता और सर्कुलर इकोनॉमी पहलों को प्रदर्शित करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है।
प्रदर्शनी में 2,000 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शक शामिल हैं, जो प्लास्टिक मूल्य श्रृंखला में उन्नत प्रौद्योगिकियाँ, मशीनरी, कच्चा माल और स्थायी समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्लास्टइंडिया 2026 को शून्य अपशिष्ट प्रदर्शनी के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जो कार्यक्रम के दौरान उत्पन्न सभी ठोस अपशिष्ट का पृथक्करण, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग सुनिश्चित करती है।
प्रदर्शनी की एक प्रमुख विशेषता केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी) की सक्रिय भागीदारी है, जो डीसीपीसी के अंतर्गत एक राष्ट्रीय संस्थान और प्लास्टइंडिया फाउंडेशन का संस्थापक सदस्य है। सीआईपीईटी पॉलिमर और प्लास्टिक क्षेत्र में कौशल विकास, अनुसंधान और तकनीकी उन्नयन में अपने योगदान को प्रदर्शित कर रहा है, और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल तैयार करने में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है।
प्रदर्शनी का अवलोकन श्रीमती निवेदिता शुक्ला वर्मा, सचिव, रसायन और पेट्रोकेमिकल्स विभाग, द्वारा किया गया, जिन्होंने सीआईपीईटी पवेलियन में उद्योग प्रतिनिधियों और छात्रों से संवाद किया। छात्रों के साथ बातचीत के दौरान, उन्होंने उन्हें वैश्विक उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप अपने कौशल को निरंतर उन्नत करने के लिए प्रोत्साहित किया और सीआईपीईटी की विकसित होती शिक्षण पद्धतियों को रेखांकित किया, जिनका उद्देश्य उद्योग-शिक्षा संबंधों को मजबूत करना है। उद्योग नेताओं के साथ अपनी चर्चाओं में उन्होंने भारतीय प्रतिभा के लिए सतत् विकास को बढ़ावा देने और वैश्विक रोजगार अवसरों को बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
प्लास्टइंडिया 2026 को पांच रणनीतिक स्तंभों—व्यापार, प्रौद्योगिकी, प्रतिभा, परंपरा और पर्यटन—के इर्द-गिर्द संरचित किया गया है। भारतीय प्लास्टिक उद्योग, जिसका वर्तमान मूल्य लगभग ₹3–3.5 लाख करोड़ है, बुनियादी ढांचा विकास, उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना जारी रखे हुए है, क्योंकि भारत 10 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ कर रहा है।






