शीतकालीन प्रवास के बाद भगवान बद्री विशाल के प्रतिनिधि स्वरूप उद्धव जी और देवताओं के खजांची कुबेर जी की पवित्र उत्सव डोलियां योगध्यान बद्री मंदिर पांडुकेश्वर से सकुशल श्री बद्रीनाथ धाम पहुंच गईं। इस दिव्य आगमन के साथ ही धाम में कपाट खुलने की तैयारियों को और गति मिल गई तथा पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर हो उठा।प्रातःकाल योगध्यान बद्री मंदिर पांडुकेश्वर में पारंपरिक पूजा-अर्चना वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद इस पावन यात्रा की शुरुआत हुई। यात्रा में भगवान बद्री विशाल की उत्सव डोली आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी पवित्र गाडू घड़ा तिल तेल कलश रावल मुख्य पुजारी सहित भगवान के सखा उद्धव जी और खजांची कुबेर जी की डोलियां भव्य रूप से बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हुईं। पूरे यात्रा मार्ग में आध्यात्मिक माहौल बना रहा। भारतीय सेना के बैंड की मधुर भक्तिमय धुनों और जय बद्री विशाल के गूंजते जयकारों के बीच श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के साथ यह पवित्र काफिला आगे बढ़ता रहा।
मार्ग में विष्णुप्रयाग लामबगड़ और हनुमानचट्टी जैसे प्रमुख पड़ावों पर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने डोलियों का पारंपरिक स्वागत किया तथा पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए पूरे मार्ग पर पुलिस द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्था की गई जिससे यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतकाल में जब बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद रहते हैं तब भगवान विष्णु के प्रतिनिधि उद्धव जी और कुबेर जी योगध्यान बद्री पांडुकेश्वर में विराजमान रहते हैं। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले इन दिव्य स्वरूपों का बद्रीनाथ धाम लौटना एक महत्वपूर्ण परंपरा है जो भगवान की निरंतर दिव्य व्यवस्था का प्रतीक है। उद्धव जी और कुबेर जी की इस पावन वापसी के साथ अब श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारियां तेज हो गई हैं और देश-विदेश के श्रद्धालु इसके लिए उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं।






