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उत्तराखंड के उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में अब उद्योगों में प्रशिक्षण होगा अनिवार्य

उत्तराखंड के उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में अब उद्योगों में प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। अप्रेंटिस इम्बेडेड डिग्री की व्यवस्था नए शैक्षिक सत्र से लागू होगी। इससे छात्रों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और उद्योगों को कुशल जनशक्ति मिलेगी। पाठ्यक्रमों को संशोधित किया जा रहा है और इंटर्नशिप की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री डा धन सिंह रावत इस संबंध में विभाग को निर्देश दे चुके हैं।

Uttarakhand Higher Education: मात्र डिग्री पाने का माध्यम बन चुके उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में अब रोजगार के द्वार भी खोलेंगे। उद्योगों और इनसे संबंधित प्रतिष्ठानों के सहयोग से डिग्री पाठ्यक्रमों के साथ अप्रेंटिस यानी उद्योगों में प्रशिक्षण को अनिवार्य किया जा रहा है।

प्रदेश में अप्रेंटिस के साथ डिग्री की व्यवस्था नए शैक्षिक सत्र से आकार लेने जा रही है। इसके साथ ही उच्च शिक्षण संस्थान उद्योगों, कृषि, प्रबंधन समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की प्रोफेसर प्रैक्टिस के रूप में सेवाएं भी अगले सत्र से ले सकेंगे।

प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरुप उच्च शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ा चुकी है। समस्त राजकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में देवभूमि उद्यमिता विकास योजना प्रारंभ की जा चुकी है। इसके अंतर्गत उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं में कौशल विकास किया जा रहा है।

अब उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम को उद्योगों के साथ जोड़ा जाएगा। इसके लिए पाठ्यक्रम को संशोधित किया जा रहा है। शैक्षिक सत्र 2025-26 से उच्च शिक्षा में इंटर्नशिप की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत उद्योगों एवं विशेषज्ञ संस्थाओं के साथ मिलकर अप्रेंटिस का रास्ता तैयार किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति के अनुसार अप्रेंटिस इम्बेडेड डिग्री में अगले सत्र से छात्र-छात्राओं काे प्रवेश देने की तैयारी है।

उच्च शिक्षा मंत्री डा धन सिंह रावत उच्च शिक्षा परिषद की बैठक में इस संबंध में विभाग को आवश्यक तैयारी के निर्देश दे चुके हैं। कौशल विकास से संबंधित पाठ्यक्रमों को क्रेडिट फ्रेमवर्क से जोड़ा जाएगा।

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